मध्य प्रदेश

MP में पढ़ाई छोड़ चुकी बेटियों के लिए नई पहल, प्रदेश में शुरू होगा ‘सरस्वती अभियान’

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में बड़ी संख्या में लड़कियां क्लास 8वीं, 10वीं या 12वीं से पहले ही स्कूल छोड़ देती हैं. शिक्षा छूटने के बाद उन्हें पढ़ाई जारी रखने का अवसर नहीं मिल पाता, जिससे उनकी शिक्षा अधूरी रह जाती है और उनके भविष्य के अवसर सीमित हो जाते हैं.

Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार (Chief Minister of Madhya Pradesh) स्कूल छोड़ चुकी लड़कियों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए इस महीने 10 मार्च से ‘सरस्वती अभियान’ (Saraswati Abhiyan) शुरू करने जा रही हैं. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन बालिकाओं को दोबारा पढ़ाई से जोड़ना है जो सामाजिक, पारिवारिक या आर्थिक स्थिति ख़राब होने की वजह से अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ चुकी हैं.

सरस्वती अभियान शुभारंभ जल्द

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरस्वती अभियान (Saraswati Abhiyan) का औपचारिक शुभारंभ 10 मार्च को सीएम डॉ. मोहन यादव (Mohan Yadav) भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे ऑडिटोरियम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान करेंगे. इस कार्यक्रम में प्रदेश के कई वरिष्ठ अधिकारी और शिक्षा संस्थानों से जुड़े लोग भी मौजूद रहेंगे.

इस अभियान के जरिये प्रदेश की उन लड़कियों को जो किसी सामाजिक, पारिवारिक या आर्थिक कारण से अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ चुकी हैं, उन्हें फिर से शिक्षा से जोड़कर आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का प्रयास किया जाएगा. लड़कियों को दौबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ‘महिला एवं बाल विकास विभाग’ (Women and Child Development Department, MP) ने ‘बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ’ योजनांतर्गत ‘सरस्वती अभियान’ की शुरुआत की है.

राज्य ओपन स्कूल प्रणाली के माध्यम से होगी पढ़ाई

अभियान के जरिये प्रदेश सरकार का लक्ष्य उन लड़कियों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ना है जो किसी कारणवश आठवीं, दसवीं या 12वीं की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाईं. कई बार परिवार की आर्थिक स्थिति, सामाजिक दबाव या घरेलू जिम्मेदारियों के कारण लड़कियां बीच में ही स्कूल छोड़ देती है और फिर उन्हें दोबारा पढ़ाई का मौका नहीं मिल पाता.

ऐसे में यह अभियान उन लड़कियों के लिए एक नई उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है. जहां पर स्कूल छोड़ चुकी लड़कियों को राज्य ओपन स्कूल प्रणाली (State Open School System) के माध्यम से पढ़ाई पूरी करने का अवसर दिया जाएगा. इसके जरिए वे आठवीं, दसवीं और 12वीं की परीक्षाओं में शामिल हो सकेंगी. सरकार का मानना है कि इससे लड़कियां अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी कर पाएंगी और आगे उच्च शिक्षा या रोजगार के बेहतर अवसर भी प्राप्त कर सकेंगी.

शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा

सरस्वती अभियान के जरिये न सिर्फ लड़कियों को दौबारा परीक्षा देने का अवसर मिलेगा बल्कि परीक्षा की तैयारी के लिए अध्ययन सामग्री और शैक्षणिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा. साथ ही मेंटरिंग (Mentoring) और काउंसलिंग के माध्यम से बालिकाओं को परीक्षा में सफल होने के लिए निरंतर सहयोग दिया जाएगा.

इस अभियान के तहत परीक्षा पास करने वाली बालिकाओं को प्रमाण-पत्र प्रदान कर आगे की शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. इस पहल का उद्देश्य न केवल बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ना है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और आत्मसम्मान का विकास करना भी है.

सर्वे के माध्यम से छात्राएं चिन्हित की जाएंगी

ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में से सबसे ज्यादा लड़कियों की पढ़ाई बीच में छोड़ने की समस्या सामने आती है. इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा शुरू किए जा रहे सरस्वती अभियान के अंतर्गत किसी वजह से स्कूल छोड़ चुकी लड़कियों की पहचान के लिए सबसे पहले सर्वे किया जाएगा.

सर्वेक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें ओपन स्कूल में नामांकित किया जाएगा और पढ़ाई के लिए आवश्यक सहायता दी जाएगी. परीक्षा पास करने वाली छात्राओं को प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा ताकि वे आगे की पढ़ाई जारी रख सकें. बता दें कि अभियान के सफल होने से लड़कियों के बीच में ही स्कूल छोड़ने की दर में कमी आएगी और महिला सशक्तिकरण को भी मजबूती मिलेगी.

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